दशहरा के अवसर पर अभिनेता मनीष वाधवा और अभिनेत्री समीक्षा जायसवाल ने अपनी कमजोरियों से लड़ने और बेहतर इंसान बनने की कोशिशों पर बात की। दोनों ने त्योहार को आत्ममंथन का अवसर बताया। मनीष के अनुसार, गुस्सा, ईर्ष्या और अहंकार जैसी भावनाओं पर नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “हम इंसान हैं भगवान नहीं”, इसलिए संकल्प के बावजूद गलतियां हो सकती हैं। उनका प्रयास रहता है कि सफलता का अहंकार काम पर हावी न हो और ध्यान अभिनय पर बना रहे। मैटिएरेस फेकेल्स के रनवे लुक में प्रियंका चोपड़ा का देसी जलवा समीक्षा ने बताया कि चुनौतीपूर्ण काम शुरू करने से पहले वह अपनी क्षमता पर संदेह करती थीं। तैयारी और अभ्यास से उनका भरोसा बढ़ा। अब वह कठिन काम से पीछे हटने के बजाय उसे छोटे चरणों में सीखने की कोशिश करती हैं। उन्होंने दूसरों की राय सुनने और अपनी गलती मानने को जरूरी बताया। समीक्षा के मुताबिक, कलाकार की सफलता में पूरी टीम का योगदान होता है। इस बात को याद रखना उन्हें विनम्र बनाए रखता है। शूटिंग से समय मिलने पर वह परिवार के साथ त्योहार मनाना पसंद करती हैं।
दशहरा के अवसर पर अभिनेता मनीष वाधवा और अभिनेत्री समीक्षा जायसवाल ने आत्ममंथन, आत्मविश्वास और अपनी कमजोरियों को दूर करने के महत्व पर अपने विचार साझा किए। दोनों कलाकारों ने इस त्योहार को केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक ही नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद नकारात्मक भावनाओं को पहचानने और बेहतर इंसान बनने का अवसर भी बताया। उनके अनुसार, दशहरा हमें अपनी कमियों पर विचार करने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देता है।
अभिनेता मनीष वाधवा का मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर कुछ न कुछ कमजोरियां होती हैं, जिनसे लड़ने के लिए लगातार प्रयास करना जरूरी है। उन्होंने गुस्से, ईर्ष्या और अहंकार जैसी भावनाओं को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मनीष के मुताबिक, इंसान से गलतियां होना स्वाभाविक है, क्योंकि हम सभी इंसान हैं, भगवान नहीं। इसलिए केवल संकल्प लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पर लगातार काम करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने के बाद व्यक्ति के भीतर अहंकार आ सकता है, लेकिन एक कलाकार के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी उपलब्धियों को अपने काम पर हावी न होने दे। मनीष का प्रयास रहता है कि वह सफलता और लोकप्रियता के बावजूद अपने अभिनय पर ध्यान केंद्रित रखें और हर नए काम से कुछ नया सीखें।
वहीं, अभिनेत्री समीक्षा जायसवाल ने अपनी कमजोरियों पर काबू पाने के लिए आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने साझा किया कि पहले किसी चुनौतीपूर्ण काम को शुरू करने से पहले वह अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगती थीं। हालांकि, समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि तैयारी, अभ्यास और धैर्य के जरिए किसी भी कठिन काम को बेहतर तरीके से सीखा जा सकता है। अब वह चुनौतियों से पीछे हटने के बजाय उन्हें छोटे-छोटे चरणों में पूरा करने की कोशिश करती हैं। समीक्षा के अनुसार, अपनी गलतियों को स्वीकार करना और दूसरों की सलाह सुनना व्यक्ति के विकास के लिए बेहद जरूरी है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि किसी कलाकार की सफलता के पीछे केवल उसकी व्यक्तिगत मेहनत नहीं, बल्कि पूरी टीम का योगदान होता है। इस बात को याद रखने से उन्हें विनम्र बने रहने में मदद मिलती है। उनका मानना है कि सफलता के साथ दूसरों के प्रति सम्मान और आभार की भावना बनाए रखना भी आवश्यक है।
दशहरा के मौके पर दोनों कलाकारों के विचार यह संदेश देते हैं कि वास्तविक विजय केवल बाहरी बुराइयों पर नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद कमजोरियों पर भी हासिल करनी चाहिए। आत्ममंथन, विनम्रता, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के जरिए व्यक्ति अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। व्यस्त शूटिंग शेड्यूल से समय मिलने पर समीक्षा जायसवाल परिवार के साथ त्योहार मनाना पसंद करती हैं। उनके लिए ऐसे अवसर अपनों के करीब रहने और जीवन की खुशियों को साझा करने का माध्यम भी हैं