नवरात्रि के छठे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा कर मां कात्यायनी को प्रणाम किया। उन्होंने देवी की स्तुति में एक प्रसिद्ध श्लोक पोस्ट किया, जिसका भावार्थ हर भक्त के मन को छू लेने वाला है।
पीएम मोदी ने लिखा—
“तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः।
निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥”
इस श्लोक का भावार्थ है— हे जगदंबिके! संसार में भला ऐसा कौन-सा शब्द है जो आपकी स्तुति नहीं है? क्योंकि आपका स्वरूप तो समस्त शब्दों से बना है। हे देवी! मेरे मन में उठने वाले सभी विचारों और बाहर दिखाई देने वाली समस्त आकृतियों व मूर्तियों में मुझे आपका ही स्वरूप दिखाई देता है।
देवीमयी स्तुति का यह अंश क्यों खास?
यह संस्कृत श्लोक मां दुर्गा की प्रसिद्ध स्तुति ‘देवीमयी’ का हिस्सा है। इसमें साधक की उस उच्च अवस्था का वर्णन है, जब उसे पूरी सृष्टि, वाणी और मन के हर संकल्प-विकल्प में केवल देवी के ही दर्शन होते हैं। साधक कहता है कि देवी का विग्रह ही संपूर्ण शब्दों और अक्षरों से रचा गया है, इसलिए हर शब्द उनकी स्तुति बन जाता है।
आज मां कात्यायनी की पूजा
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं। एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल पुष्प तथा शेष दोनों हाथ वरदा और अभय मुद्रा में हैं। उनका वाहन सिंह है। मान्यता है कि महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था, इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। भक्त मुख्य रूप से शीघ्र विवाह, वैवाहिक बाधाओं के निवारण और मनचाहा वर पाने के लिए मां कात्यायनी की उपासना करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के इस पोस्ट ने एक बार फिर नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और संस्कृति के संदेश को सोशल मीडिया पर जीवंत कर दिया है।