वायु
प्रदूषण का असर केवल खांसी, सांस फूलने या फेफड़ों की परेशानी तक सीमित नहीं है। दूषित हवा में मौजूद
महीन कण हृदय और रक्तवाहिकाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन
वायु प्रदूषण को स्ट्रोक के जोखिम से जुड़ा कारक मानता है। हालांकि, बढ़ता एक्यूआई अपने आप में दिमाग की नसें बंद होने का प्रमाण नहीं है। यह
हवा की गुणवत्ता का संकेतक है, जबकि स्वास्थ्य पर असर प्रदूषकों
और उनके संपर्क की अवधि से जुड़ा होता है। FSSAI की कार्रवाई से Old
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पढ़ें लोकल खबरें पढ़ें दूषित हवा में मौजूद पीएम2.5 जैसे
महीन कण विशेष चिंता का कारण हैं। सांस के साथ ये फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते
हैं। प्रदूषक कणों और उनके कुछ घटकों का प्रभाव रक्त परिसंचरण तक भी पहुंच सकता
है। इसलिए खराब हवा को केवल सांस की बीमारी वाले लोगों की समस्या समझना पर्याप्त
नहीं है। इसका संबंध हृदय और मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों से भी
पाया गया है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, सांस के जरिए
शरीर में पहुंचे प्रदूषक कण सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव जैसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा
दे सकते हैं। इससे रक्तवाहिकाओं के कामकाज में बदलाव और रक्त के थक्के बनने की
प्रवृत्ति प्रभावित हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में मस्तिष्क तक रक्त पहुंचने
में बाधा पैदा हो सकती है। यह प्रदूषण और स्ट्रोक के बीच संभावित जैविक संबंध
समझाता है; हर व्यक्ति में ऐसा होना निश्चित नहीं है। महंगे
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आसान विकल्प स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क
के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क में रक्तस्राव होता
है। रक्तवाहिका में रुकावट वाले प्रकार को इस्कीमिक स्ट्रोक कहा जाता है, जबकि रक्तस्राव वाला प्रकार हेमरेजिक स्ट्रोक होता है। दोनों गंभीर
स्थितियां हैं। इसलिए स्ट्रोक को केवल ‘दिमाग की नस ब्लॉक होना’ कहना इसकी पूरी
तस्वीर नहीं बताता। प्रदूषण के साथ दूसरे जोखिम कारकों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का प्रमुख जोखिम कारक है। मधुमेह, अधिक
कोलेस्ट्रॉल, हृदय संबंधी बीमारी और धूम्रपान भी खतरा बढ़ाते
हैं। जिन लोगों को पहले से ऐसी समस्याएं हैं, उन्हें अपनी
नियमित चिकित्सा और दवाओं का पालन करना चाहिए। प्रदूषण की चिंता के कारण रक्तचाप
या शुगर के नियंत्रण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सिर्फ डाइट से नहीं संभलेगी शुगर, जानें क्यों स्ट्रोक के संकेत अक्सर अचानक दिखाई देते हैं। चेहरे का एक
तरफ झुकना, एक हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन और बोलने
या बात समझने में परेशानी प्रमुख लक्षण हैं। अचानक नजर में बदलाव, संतुलन बिगड़ना, चलने में कठिनाई और बिना स्पष्ट
कारण तेज सिरदर्द भी चेतावनी हो सकते हैं। इन्हें थकान समझकर टालना खतरनाक हो सकता
है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण शुरू होने का
समय याद रखें और अस्पताल पहुंचने में देरी न करें। कुछ समय बाद लक्षण ठीक हो जाएं,
तब भी जांच जरूरी है। यह क्षणिक इस्कीमिक अटैक हो सकता है, जिसे भविष्य के स्ट्रोक की चेतावनी माना जाता है। शुरुआत में घर पर यह
पहचानना संभव नहीं होता कि परेशानी अस्थायी है या बड़ा स्ट्रोक। बिना
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संपर्क कम करने के लिए स्थानीय वायु गुणवत्ता देखकर बाहर की गतिविधियां तय करें।
हवा खराब होने पर लंबे समय तक तेज व्यायाम या भारी मेहनत कम करें। धुएं और कण
प्रदूषण के बीच बाहर जाना जरूरी हो तो सही फिट वाला एन95 मास्क
संपर्क घटाने में मदद कर सकता है। इसका उपयोग दूसरे बचाव उपायों के साथ करें।
स्वस्थ दिनचर्या, धूम्रपान से दूरी और रक्तचाप, शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल का नियंत्रण स्ट्रोक से बचाव के महत्वपूर्ण हिस्से
हैं। प्रदूषण का जोखिम समझने के साथ अचानक दिखाई देने वाले लक्षणों पर तुरंत
कार्रवाई करना भी जरूरी है।