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IMF का अनुमान: भारत की अर्थव्यवस्था FY27 और FY28 में 7% की दर से बढ़ेगी

Posted on: 2026-10-13
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IMF का अनुमान: भारत की अर्थव्यवस्था FY27 और FY28 में 7% की दर से बढ़ेगी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी अक्टूबर 2026 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027 और 2028 दोनों में 7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। हालांकि, इस रिपोर्ट में  वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती कमजोर पड़ने की चेतावनी भी दी गई है।

भारत की तेज वृद्धि के पीछे मजबूत घरेलू मांग

IMF के अनुसार, भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वालों में शामिल है। इस अनुमान के पीछे उम्मीद से ज्यादा तेज गति, मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियां प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से FY27 और FY28 दोनों वर्षों के लिए 7 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान जताया गया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत लेकिन नाजुक

रिपोर्ट में कहा गया है, “वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन यह मजबूती कमजोर और असमान होती जा रही है।” IMF ने 2026 में वैश्विक वृद्धि 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वैश्विक महंगाई 2026 में बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो जाएगी, जिसकी मुख्य वजह ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें होंगी। 2027 में यह घटकर 4.1 प्रतिशत रह सकती है।

ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का खतरा

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष, कमोडिटी कीमतों और तकनीक से जुड़े निवेश की मजबूती के आधार पर ऊर्जा झटके का असर अलग-अलग देशों पर अलग-अलग पड़ रहा है। IMF ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था बार-बार आए झटकों का सामना करने में सफल रही है। इसमें ऊर्जा आपूर्ति में लचीलापन, अन्य देशों में बढ़ा उत्पादन, इन्वेंट्री का इस्तेमाल, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुझान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन फंड ने चेतावनी दी है कि अगर रुकावटें बनी रहीं तो ये सहारे पर्याप्त नहीं हो सकते। ऊर्जा इन्वेंट्री में कमी, और ज्यादा भू-राजनीतिक झटके तथा लंबे समय तक बनी अनिश्चितता भरोसे और आर्थिक गतिविधियों पर बुरा असर डाल सकती है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है— “जोखिम नीचे की ओर झुके हुए हैं।”

व्यापार और असंतुलन पर भी नजर

IMF के अनुसार, 2026 में वैश्विक व्यापार मात्रा की वृद्धि धीमी हो जाएगी और 2027 में स्थिर रहेगी। इसका कारण टैरिफ, प्रोडक्शन चेन में बदलाव और तकनीक से जुड़े व्यापार की मजबूती है। मध्यम अवधि में वैश्विक असंतुलन में केवल मामूली कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश रिटर्न के अचानक पुनर्मूल्यांकन का जोखिम भी है, जिससे निवेश कम हो सकता है, इक्विटी बाजार में करेक्शन आ सकता है और वित्तीय स्थितियां सख्त हो सकती हैं।

नीतिगत बफर बढ़ाने की सलाह

रिपोर्ट में अर्थव्यवस्थाओं से अपील की गई है कि वे नीतिगत बफर को फिर से बनाएं और भविष्य के झटकों का सामना करने की क्षमता मजबूत करें। ज्यादा कर्ज लागत और बढ़ा हुआ सार्वजनिक कर्ज सरकारों के पास प्रतिक्रिया देने की गुंजाइश को सीमित कर रहा है।

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