केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में मध्य-करियर प्रशिक्षण (एमसीटी) चरण-III कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों के साथ बातचीत की, जिसमें उन्होंने भारत की संरक्षण संबंधी उपलब्धियों और उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए नवीन दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
विभिन्न राज्य कैडर के अधिकारियों को संबोधित करते हुए यादव ने भारत के जंगलों, वन्यजीवों और पारिस्थितिक विरासत की रक्षा में उनकी भूमिका को सराहा। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, वन और वृक्ष आवरण के विस्तार, कार्बन पृथक्करण, आर्द्रभूमि संरक्षण और भूदृश्य पुनर्स्थापन में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।
मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी पहलों जैसे \'एक पेड़ मां के नाम\', \'मिष्टी\', \'अरावली ग्रीन वॉल\' और \'नगर वन योजना\' का भी उल्लेख किया।
यादव ने सतत विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि \'विकसित भारत@2047\' की परिकल्पना में आर्थिक विकास को पारिस्थितिक सुरक्षा के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष, जंगल की आग, जलवायु परिवर्तन और विकास तथा संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को प्रमुख चुनौतियों के रूप में पहचाना, जिनके लिए वैज्ञानिक समाधान और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता है।
भारत की विविध जलवायु परिस्थितियों, पारिस्थितिक तंत्रों और जैव विविधता पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि आईएफएस अधिकारियों को बदलती चुनौतियों के अनुकूल होना चाहिए और जमीनी स्तर पर वन और वन्यजीव संरक्षण में नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने जैविक संसाधनों को ग्रह की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक बताया और कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को क्षेत्र स्तर पर कार्यान्वयन के अनुभव के साथ-साथ मंत्री स्तरीय नीति निर्माण से अवगत कराएगा।
यादव ने अधिकारियों को पारंपरिक दृष्टिकोण से परे सोचने और पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
भारतीय वन सेवा की बदलती जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे पारंपरिक नियामक भूमिकाओं से आगे बढ़कर सतत विकास के नेताओं, नवप्रवर्तकों और सूत्रधारों के रूप में उभरें।
मंत्री ने वन प्रबंधन और संरक्षण नियोजन में सुधार के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), रिमोट सेंसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने निरंतर क्षमता निर्माण, मजबूत संस्थागत ढांचे और संरक्षण प्रयासों में पारंपरिक ज्ञान के उपयोग सहित अधिक सामुदायिक भागीदारी का भी आह्वान किया।
यादव ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे भारत के पारिस्थितिक भविष्य की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए निर्णय लेने और वन प्रबंधन योजना बनाने में नवीन दृष्टिकोण अपनाएं।
इस संवाद में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण, वन महानिदेशक और विशेष सचिव संतोष तिवारी, वन्यजीव के अतिरिक्त महानिदेशक रमेश पांडे और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) के निदेशक राजेंद्र प्रसाद खजूरिया शामिल थे।
मध्य-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम 2026
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी द्वारा आयोजित एमसीटी चरण-III (19) कार्यक्रम 12 अक्टूबर से 6 नवंबर, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम सात से नौ वर्ष की सेवा वाले आईएफएस अधिकारियों के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसमें 18 कैडरों के 68 प्रतिभागियों को एक साथ लाया गया है, जो वन्यजीव संरक्षण, जलवायु-लचीली वानिकी, पर्यावास और परिदृश्य बहाली और पर्यावरण नीति कार्यान्वयन में विविध अनुभव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों और समकालीन प्रबंधन पद्धतियों को शामिल करते हुए नेतृत्व क्षमताओं, रणनीतिक नीति कार्यान्वयन और वन शासन को मजबूत करना है।
कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, लाइन मिनिस्ट्री मॉड्यूल प्रतिभागियों को प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों और संगठनों से परिचित कराएगा ताकि अंतर-क्षेत्रीय समन्वय और नीतिगत ढांचों के बारे में उनकी समझ में सुधार हो सके।
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की विषयगत यात्राएं भी शामिल होंगी, जिनमें वन्यजीव प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक पर्यटन और समुदाय आधारित वन प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
प्रबंधन मॉड्यूल में नेतृत्व और निर्णय लेने, मानव संसाधन और वित्तीय प्रबंधन, वन संपदा का शासन, बातचीत और संघर्ष समाधान, परिवर्तन प्रबंधन, संचार और नैतिक नेतृत्व को शामिल किया जाएगा।
वानिकी मॉड्यूल में अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलनों, वानिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, वन्यजीव नेतृत्व, जैव विविधता शासन और जलवायु वित्त सहित उभरते पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इसमें वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), जलसंभर प्रबंधन, वन संरक्षण कानून में हाल ही में किए गए संशोधनों और मानव-वन्यजीव संघर्ष से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य मध्य-करियर के आईएफएस अधिकारियों को देश भर में उभरती संरक्षण चुनौतियों से निपटने और सतत वन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान से लैस करना है।