अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने एक बड़े फैसले के तहत दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की है। इनमें कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने निलंबन के पीछे कई चल रही संघीय जांचों को वजह बताया है। इस कार्यक्रम से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को भी निलंबित किया गया है।
वीजा धोखाधड़ी पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर एच-1बी वीजा कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “एच-1बी वीजा कार्यक्रम का उद्देश्य कंपनियों को अमेरिका के बाहर से वास्तव में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को उन पदों के लिए लाने की अनुमति देना है, जिन्हें अमेरिकी कर्मचारियों की मदद से भरना लगभग असंभव है। दुर्भाग्य से, यह कार्यक्रम धोखाधड़ी से बुरी तरह प्रभावित हो गया है।”
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा, “आज की यह घोषणा अमेरिका के प्रत्येक नियोक्ता को एक कड़ा संदेश देनी चाहिए और दे रही है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी कर्मचारियों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं करेगा।”
वेंस ने प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने हजारों एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड का लाभ उठाते हुए अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की।
वेंस के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि उसे 6,300 एच-1बी वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ मिला।
उन्होंने कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला। उसी समय कंपनी को 6,300 एच-1बी वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ मिला। अगर आप हिसाब लगाएं, तो माइक्रोसॉफ्ट ने जिस अमेरिकी कर्मचारी को नौकरी से निकाला, उसकी जगह डेढ़ विदेशी बंधुआ कर्मचारी रखे।”
वेंस ने कहा कि प्रशासन की ओर से चल रही जांच के कारण माइक्रोसॉफ्ट को इस कार्यक्रम से निलंबित किया गया है।
उन्होंने आगे कहा, “यह एक शर्मनाक व्यवस्था है, जिसे हमने इस देश में बहुत लंबे समय तक चलने दिया। लेकिन इस कार्यबल के प्रयासों और अमेरिकी राष्ट्रपति को मिली शक्तियों के कारण अब इसे रोका जाएगा। चल रही जांच के परिणामस्वरूप हमने माइक्रोसॉफ्ट को कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। इसका मतलब है कि अब कंपनी इन वीजा का इस्तेमाल कर स्थायी दर्जा हासिल करने की प्रक्रिया के लिए आवेदन नहीं कर सकेगी।”
उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि अमेरिका में काम करने वाली कंपनियां विस्तार करें, लेकिन इस दौरान अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता दें।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा, “माइक्रोसॉफ्ट और किसी भी अन्य विदेशी या घरेलू कंपनी के लिए हमारा संदेश स्पष्ट है। हम चाहते हैं कि आप अमेरिका में आगे बढ़ें। हम चाहते हैं कि लोग अमेरिका में निवेश करें, खासकर अमेरिकी प्रौद्योगिकी क्षेत्र में। हम आपके उद्योग के सबसे बड़े समर्थक हैं। हम चाहते हैं कि आप अपना कारोबार बढ़ाएं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दें, लेकिन हम चाहते हैं कि आप अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी दें। आप एक महान अमेरिकी कंपनी हैं, लेकिन आपको योग्य अमेरिकी कर्मचारियों को नियुक्त करना होगा। आप अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह विदेशी बंधुआ श्रमिकों को नहीं रख सकते।”
अमेरिकी श्रम सचिव ने आगे कहा कि विभाग इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के नए आवेदन स्वीकार नहीं करेगा और पहले से लंबित आवेदनों पर भी कार्रवाई नहीं करेगा।
सोंडरलिंग ने कहा, “हम इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के किसी भी नए आवेदन को स्वीकार नहीं करेंगे और न ही लंबित आवेदनों पर कार्रवाई करेंगे।”
उन्होंने बताया कि सूची में शामिल कंपनियों ने सामूहिक रूप से लाखों विदेशी कर्मचारियों की मांग की थी और उन्हें एच-1बी वीजा के लिए हजारों नहीं, बल्कि लाखों में आवेदन मंजूरियां तथा स्थायी श्रम प्रमाणन प्राप्त हुए हैं।
सोंडरलिंग ने कहा, “2009 से अब तक केवल इन कंपनियों ने ही करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया है। इन्हें 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूरियां और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले हैं। ये सैकड़ों हजार नौकरियां हैं, जो अमेरिकी कर्मचारियों से छिन गईं।”
यह घोषणा अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा 7 अक्टूबर को एफ-1 गैर-आप्रवासी छात्र वीजा धारकों के लिए वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) में भाग लेने को लेकर नए शुल्क प्रस्तावित किए जाने के एक दिन बाद आई है। विभाग ने इस कदम को अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा और आव्रजन व्यवस्था की विश्वसनीयता मजबूत करने का प्रयास बताया है।
7 अक्टूबर को घोषित प्रस्तावित नियम के तहत गृह सुरक्षा विभाग शुरुआती ओपीटी के लिए प्रत्येक एफ-1 गैर-आप्रवासी छात्र पर 70,000 डॉलर और इसके बाद के प्रत्येक ओपीटी के लिए 30,000 डॉलर का शुल्क निर्धारित करेगा।
गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार, इस प्रस्ताव का उद्देश्य अमेरिका में सस्ते श्रम के प्रवाह को कम करना, धोखाधड़ी और दुरुपयोग पर रोक लगाना तथा अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धा आसान बनाना है।
विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, “वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण को कभी भी अमेरिकी कार्यबल में प्रवेश का पिछला दरवाजा, सस्ते श्रम के लिए सरकारी सहायता या व्यवस्था का गलत फायदा उठाने वालों के लिए पुरस्कार बनाने का उद्देश्य नहीं था। गृह सुरक्षा विभाग ओपीटी की व्यवस्था को इस तरह बेहतर बना रहा है कि विदेशी छात्रों को नियोक्ताओं के सामने अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी। अमेरिकी कर्मचारियों को ऐसी व्यवस्था के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए, जिसे सस्ते विदेशी श्रम की आपूर्ति का माध्यम बना दिया गया है।”
मौजूदा संघीय नियमों के तहत पात्र एफ-1 छात्र ओपीटी में तब भाग ले सकते हैं, जब उनका रोजगार उनकी पढ़ाई के मुख्य विषय से सीधे तौर पर संबंधित हो। इसके लिए छात्रों को अपने निर्धारित शैक्षणिक संस्थान के अधिकारी से सिफारिश लेनी होती है और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के पास रोजगार की अनुमति के लिए आवेदन करना होता है।
पात्र छात्रों को शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर अधिकतम 12 महीने तक ओपीटी का लाभ मिल सकता है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग या गणित के क्षेत्रों में डिग्री हासिल करने वाले छात्र अतिरिक्त 24 महीने के विस्तार के लिए भी पात्र हो सकते हैं।
गृह सुरक्षा विभाग ने कहा कि प्रस्तावित बदलाव छात्र एवं विनिमय आगंतुक कार्यक्रम की ओर से धोखाधड़ी और दुरुपयोग के मामलों की पहचान किए जाने के बाद लाए गए हैं। इनमें संदिग्ध कार्यस्थलों और पैसे लेकर वीजा की वैधता बनाए रखने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
प्रस्तावित शुल्क उन शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जमा किया जाएगा, जिन्हें छात्र एवं विनिमय आगंतुक कार्यक्रम से प्रमाणन प्राप्त है। यह शुल्क उस समय जमा करना होगा, जब संस्थान के नामित अधिकारी छात्र एवं विनिमय आगंतुक सूचना प्रणाली में ओपीटी के लिए छात्र की सिफारिश करें। यह प्रक्रिया छात्रों के यूएससीआईएस के पास रोजगार अनुमति के लिए आवेदन करने से पहले पूरी करनी होगी।
विभाग ने कहा कि यह प्रस्तावित शुल्क तब लागू होगा, जब कोई संस्थान एफ-1 छात्र को किसी भी प्रकार के ओपीटी के लिए सिफारिश करेगा। यह शुल्क किसी विशेष नियोक्ता से जुड़ा नहीं होगा। इससे एकत्रित धनराशि अमेरिकी राजकोष में जमा की जाएगी।
गृह सुरक्षा विभाग 8 अक्टूबर से 9 नवंबर तक प्रस्तावित नियम पर आम जनता से टिप्पणियां स्वीकार करेगा। वहीं, कागजी कार्रवाई में कमी से संबंधित अधिनियम के प्रावधान के तहत अलग से 60 दिनों की सार्वजनिक टिप्पणी अवधि रखी जाएगी।