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नीति आयोग ने शून्य-उत्सर्जन ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए पीएसीटी और जेडईटी मार्केटप्लेस किया लॉन्च

Posted on: 2026-09-08
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नीति आयोग ने शून्य-उत्सर्जन ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए पीएसीटी और जेडईटी मार्केटप्लेस किया लॉन्च

भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग ने ई-फास्ट इंडिया पहल के तहत पीएसीटी की शुरुआत की है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने सोमवार को 5वें ई-फास्ट इंडिया समिट 2026 में इसका शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य शिपर्स, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, वाहन निर्माताओं, वित्तदाताओं, चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटरों और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के लिए व्यावसायिक आधार मजबूत करना है। सम्मेलन में व्यापार, वित्तपोषण और चार्जिंग साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए जेडईटी मार्केटप्लेस भी शुरू किया गया।

माल ढुलाई के लिए साझा मंच तैयार

ई-फास्ट इंडिया की प्रमुख पहल पीएसीटी को शिपर्स, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं और अन्य इकोसिस्टम हितधारकों से माल ढुलाई की मांग जुटाने तथा चिन्हित माल ढुलाई कॉरिडोर में शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। इसका लक्ष्य मांग को स्पष्ट करना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाने में मदद करना और इलेक्ट्रिक मध्यम एवं भारी-शुल्क वाहनों के लिए व्यावसायिक आधार मजबूत करना है।

ई-माल ढुलाई बाजार में तेजी

पीएसीटी की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब भारत में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। ई-फ्रेट वाहनों के उपयोग में चार गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025 में इनकी संख्या 201 थी, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 826 हो गई। वर्तमान में देशभर में 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक मध्यम और भारी-शुल्क (ई-एमएचडी) ट्रक परिचालन में हैं।

मांग, चार्जिंग और वित्तपोषण पर फोकस

ई-ट्रकों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए मांग को एकजुट करने, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करने और वित्त तक पहुंच बेहतर बनाने की जरूरत है। पीएसीटी के जरिए फ्लीट ऑपरेटरों और निवेशकों को अधिक व्यावसायिक निश्चितता देने के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

सहयोग से अगले चरण की चुनौतियों का समाधान

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि भारत ने घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षमता और सहायक नीतिगत तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि विकास के अगले चरण में व्यापक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग महत्वपूर्ण होगा। पीएसीटी और जेडईटी मार्केटप्लेस विभिन्न हितधारकों को साझा मंच पर ला रहे हैं।

नवाचार आधारित वित्तपोषण पर जोर

गौबा ने कहा कि माल ढुलाई के विद्युतीकरण को गति देने के लिए नए वित्तपोषण मॉडल, कॉरिडोर आधारित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार संचालित साझेदारियां महत्वपूर्ण होंगी। इनके माध्यम से ई-ट्रकों को व्यावसायिक रूप से अपनाने की प्रक्रिया तेज करने और भारत के स्वच्छ परिवहन तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

लॉजिस्टिक्स और बैटरी प्रबंधन में नवाचार जरूरी

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि इलेक्ट्रिक माल ढुलाई को गति देने के लिए लॉजिस्टिक्स संचालन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के वित्तपोषण और बैटरी प्रबंधन में नवाचार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बैटरी निगरानी प्रणाली और अधिक उपयोग वाले वाहनों के लिए नए परिचालन मॉडल पारदर्शिता बढ़ाने तथा वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

निवेश जोखिम कम करने पर जोर

उमाशंकर ने कहा कि बेहतर बैटरी निगरानी और नए परिचालन मॉडल वित्तपोषण जोखिम को कम कर सकते हैं और अधिक निवेश आकर्षित कर सकते हैं। उद्योग की बढ़ती रुचि और मांग के बीच भारत व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य इलेक्ट्रिक ट्रकिंग इकोसिस्टम तैयार करने की स्थिति में है, जो लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूत कर सकता है।

जेडईटी मार्केटप्लेस से मिलेंगे कारोबारी अवसर

शिखर सम्मेलन में शुरू किया गया जेडईटी मार्केटप्लेस ई-ट्रक निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं (एलएसपी), चार्ज प्वाइंट ऑपरेटरों (सीपीओ), वित्तदाताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों को जोड़ने वाला व्यावसायिक मंच है। इसके जरिए प्रतिभागी अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, कारोबारी अवसर तलाशने और शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई परियोजनाओं के लिए जरूरी साझेदारियां विकसित कर सकेंगे।

परियोजनाओं को योजना से क्रियान्वयन तक ले जाने का लक्ष्य

जेडईटी मार्केटप्लेस का उद्देश्य शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई परियोजनाओं को शुरुआती योजना से लेकर वास्तविक क्रियान्वयन तक पहुंचाने में मदद करना है। इसके माध्यम से वाहन, चार्जिंग, वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी से जुड़े हितधारकों के बीच कारोबारी संपर्क को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

वित्त और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर मंथन

5वें ई-फास्ट इंडिया समिट के पूर्ण और तकनीकी सत्रों में वित्तपोषण एवं जोखिम कम करने के तंत्र, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, नीतिगत प्राथमिकताओं और शुरुआती परियोजनाओं से मिली सीख पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने अलग-अलग प्रायोगिक परियोजनाओं से आगे बढ़कर समन्वित और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बड़े पैमाने के कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

बाजार तैयारी से आगे बढ़कर क्रियान्वयन पर जोर

ई-फास्ट इंडिया प्लेटफॉर्म अब बाजार की तैयारी से आगे बढ़कर वास्तविक परियोजनाओं के क्रियान्वयन को सक्षम बनाने की दिशा में काम कर रहा है। पीएसीटी और जेडईटी मार्केटप्लेस के जरिए नीति आयोग और उसके साझेदार माल ढुलाई की मांग, निवेश रुचि और तकनीकी तैयारी को बड़े पैमाने पर शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई परियोजनाओं में बदलने का लक्ष्य रख रहे हैं।

करीब 250 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, एमएचआई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हनीफ कुरैशी, नीति आयोग की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कार्यक्रम निदेशक अर्चना मित्तल, डब्ल्यूआरआई के कार्यकारी कार्यक्रम निदेशक पवन मुलुकुटला समेत उद्योग, वित्त और माल ढुलाई क्षेत्र से जुड़े करीब 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

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