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एनीमिया मुक्त भारत अभियान को नई गति, डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च; राज्यों को किया गया सम्मानित

Posted on: 2026-08-13
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एनीमिया मुक्त भारत अभियान को नई गति, डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च; राज्यों को किया गया सम्मानित

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 से 13 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में एनीमिया मुक्त भारत अभियान (एएमबी) पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 160 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में एनीमिया की रोकथाम और उपचार को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय, लाभार्थी स्तर पर डिजिटल ट्रैकिंग और समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इस दौरान एनीमिया मुक्त भारत अभियान के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन का शुभारंभ किया गया तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सम्मानित किया गया।

एनीमिया से निपटने के लिए बेहतर समन्वय जरूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि एनीमिया की व्यापक समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल और विभिन्न मंत्रालयों के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। उन्होंने स्क्रीनिंग, सेवा वितरण और जन जागरूकता से जुड़े प्रयासों को एकीकृत करने पर जोर दिया।

जीवन चक्र दृष्टिकोण अपनाने पर जोर

पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि एनीमिया से निपटने के प्रयासों को जीवन चक्र दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने जन जागरूकता बढ़ाने और गर्भावस्था के बाद भी किशोरों तथा युवा आयु वर्ग के लोगों को आयरन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से जुड़े हस्तक्षेप उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

7×7×7 रणनीति से मजबूत होगा अभियान

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा 29 जून, 2026 को जारी संशोधित एनीमिया मुक्त भारत अभियान परिचालन दिशानिर्देशों को एनीमिया से निपटने की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। संशोधित दृष्टिकोण केवल पूरक आहार और रोकथाम तक सीमित न रहकर जांच, केस आधारित प्रबंधन, उपचार अनुपालन, पौष्टिक और विविध आहार तथा लाभार्थियों की डिजिटल निगरानी पर केंद्रित है।

6×6×6 से 7×7×7 की ओर बढ़ा अभियान

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने राज्य, जिला, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्तर पर संशोधित अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पुराने 6×6×6 ढांचे से मजबूत 7×7×7 दृष्टिकोण की ओर बढ़ने का उल्लेख करते हुए आयरन पूरक आहार के सेवन और अनुपालन में सुधार, जन भागीदारी बढ़ाने तथा राज्य स्तर के नवाचारों को मापने योग्य परिणामों में बदलने पर जोर दिया।

डिजिटल ट्रैकिंग से लाभार्थियों की होगी निगरानी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव (आरसीएच) मीरा श्रीवास्तव ने एनीमिया के प्रबंधन में केवल अनुपालन पर आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर जांच, निगरानी और समय पर समाधान पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने लाभार्थी स्तर पर डिजिटल लाइन-लिस्टिंग, डेटा प्रबंधन और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ डिजिटल एकीकरण को महत्वपूर्ण बताया।

तीन महीने बाद दोबारा जांच पर जोर

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने एनीमिया के प्रबंधन में साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने समय पर जांच, एनीमिया की गंभीरता और कारण के अनुसार उपचार, तीन महीने बाद दोबारा जांच, आयरन युक्त संतुलित आहार और जरूरत के अनुसार नए आयरन फॉर्मूलेशन के इस्तेमाल की बात कही।

एनीमिया के लिए बहुक्षेत्रीय रणनीति जरूरी

नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास ने एनीमिया से निपटने के लिए सहयोगात्मक और बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने सूक्ष्म पोषक तत्वों, आयरन और प्रोटीन के सेवन, आहार में विविधता तथा अंतर्निहित बीमारियों और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों को उपचार के परिणामों से जोड़कर देखने पर जोर दिया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और लक्षित कार्ययोजना तैयार करने के लिए डिजिटल एकीकरण, उन्नत विश्लेषण और एआई के इस्तेमाल की आवश्यकता भी बताई।

नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च

कार्यशाला में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के नए एप्लिकेशन और पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इसका उद्देश्य एनीमिया से पीड़ित लाभार्थियों की निगरानी, फॉलो-अप और उपचार प्रबंधन को मजबूत करना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्क्रीनिंग में एनीमिया से ग्रस्त पाए गए लाभार्थियों को ट्रैक किया जा सकेगा। इससे उपचार और अनुपालन की निगरानी, देखभाल की निरंतरता और पूरी तरह ठीक होने तक फॉलो-अप में मदद मिलेगी।

डेटा के आधार पर होगी सुधारात्मक कार्रवाई

नए डिजिटल प्लेटफॉर्म से ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी जहां अतिरिक्त हस्तक्षेप की जरूरत है। इससे कार्यक्रम की समीक्षा के लिए डेटा उपलब्ध होगा और जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। लाभार्थी स्तर पर ट्रैकिंग से एनीमिया के उपचार की स्थिति और फॉलो-अप को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सम्मान

कार्यशाला के दौरान एनीमिया मुक्त भारत अभियान के हस्तक्षेपों को प्रभावी तरीके से लागू करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री भी जारी की गई। तकनीकी सत्रों में एनीमिया की जांच और परीक्षण, डिजिटल एप्लिकेशन, डेटा विश्लेषण, रोकथाम, कृमिनाशक, अनुपालन ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

राज्यों ने साझा किए जमीनी अनुभव

कार्यशाला के दूसरे दिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की टीमों ने तीन प्रमुख विषयों पर समूह कार्य किया। इनमें सामुदायिक स्वामित्व के लिए जन भागीदारी, अंतर-मंत्रालयी समन्वय और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियां शामिल थीं। टीमों ने जमीनी अनुभव और व्यावहारिक नवाचार साझा किए। इन अनुभवों को एनीमिया मुक्त भारत अभियान के राष्ट्रीय स्तर पर आगे के कार्यान्वयन की रणनीति में शामिल किया गया।

उपचार प्रबंधन पर भी तकनीकी सत्र

कार्यशाला में चिकित्सीय प्रबंधन पर भी तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें मौखिक और अंतःशिरा आयरन प्रोटोकॉल, जन भागीदारी और सही खान-पान जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने एनीमिया के उपचार के साथ पोषण, उपचार अनुपालन और नियमित निगरानी को जोड़कर आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।

स्वस्थ विकसित भारत की दिशा में सामूहिक प्रयास

राष्ट्रीय कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सरकारी विभागों, स्वास्थ्य व्यवस्था के अधिकारियों, समुदायों, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों और विभिन्न भागीदारों के बीच समन्वित कार्रवाई जरूरी है। अभियान के संशोधित ढांचे, डिजिटल निगरानी और बहुक्षेत्रीय सहयोग के जरिए एनीमिया की रोकथाम, पहचान और उपचार को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।

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