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महिला हॉकी विश्व कप में गोल्ड पर भारत की नजर, कप्तान सलीमा टेटे बोलीं- ‘इस बार विश्व कप हमारा होगा’

Posted on: 2026-08-11
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महिला हॉकी विश्व कप में गोल्ड पर भारत की नजर, कप्तान सलीमा टेटे बोलीं- ‘इस बार विश्व कप हमारा होगा’

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने FIH हॉकी महिला विश्व कप 2026 में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि टीम के पास शीर्ष सम्मान के लिए चुनौती पेश करने का विश्वास और क्षमता दोनों हैं। यह भरोसा जून में न्यूजीलैंड में FIH नेशंस कप जीतने के बाद और मजबूत हुआ है।

भारत ने ऑकलैंड में आयोजित नेशंस कप में पूरे टूर्नामेंट के दौरान अजेय रहते हुए शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने फाइनल में मेजबान न्यूजीलैंड को 2-0 से हराकर खिताब अपने नाम किया।

विश्व कप से पहले JioStar से बातचीत में सलीमा टेटे ने कहा कि नेशंस कप की सफलता ने टीम के आत्मविश्वास को काफी बढ़ाया है और खिलाड़ी इस प्रदर्शन को विश्व कप में भी दोहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उन्होंने कहा, “कप्तान के रूप में मेरी भूमिका मैदान पर हर खिलाड़ी का समर्थन करना है। हम हारें या जीतें, मैं टीम के साथ खड़ी रहती हूं। इस बार FIH हॉकी विश्व कप हमारा होगा। हम समझदारी और आक्रामक हॉकी खेलेंगे और पदक लेकर आएंगे। मुझे अपनी टीम पर पूरा भरोसा है। हमारे अंदर यह करने की क्षमता है।”

बेल्जियम और नीदरलैंड्स की संयुक्त मेजबानी में होने वाला विश्व कप 15 से 30 अगस्त तक खेला जाएगा। भारत को पूल डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ रखा गया है। भारत के सभी ग्रुप मुकाबले नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेले जाएंगे।

भारत अपने अभियान की शुरुआत 16 अगस्त को चीन के खिलाफ करेगा। इसके बाद 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका और 20 अगस्त को इंग्लैंड से मुकाबला होगा।

अपने दूसरे विश्व कप में हिस्सा लेने जा रहीं टेटे ने कहा कि नेशंस कप की सफलता ने टीम को बड़े टूर्नामेंट के लिए महत्वपूर्ण आत्मविश्वास दिया है।

उन्होंने कहा, “हर खिलाड़ी का सपना विश्व कप खेलना और पदक जीतना होता है। न्यूजीलैंड में हमारा पिछला टूर्नामेंट, FIH नेशंस कप, शानदार रहा। हमने उसे जीता और पदक अपने घर लाए। इसलिए इस बार विश्व कप में भी हमारा लक्ष्य वही है।”

उन्होंने कहा कि टीम प्रत्येक मुकाबले को समान महत्व देगी और अपना सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलकर स्वर्ण पदक जीतने के लिए पूरी तरह दृढ़ है।

विश्व कप की तैयारी के लिए भारतीय टीम ने बेंगलुरु में प्रशिक्षण शिविर लगाया और इसके बाद जर्मनी में अभ्यास किया। जर्मनी में टीम ने मेजबान टीम के खिलाफ दो अभ्यास मैच खेले और फिर नीदरलैंड्स पहुंची।

टेटे ने टीम के युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जूनियर खिलाड़ी टीम में आते ही काफी ऊर्जा लेकर आते हैं और पदक जीतने के लिए पूरी मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने साक्षी राणा, इशिका और रुतुजा दादासो पिसाल जैसी युवा खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीदों के दबाव के बिना अपना खेल खेलने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

टेटे ने कहा, “मैं उनसे हमेशा कहती हूं कि खुलकर खेलो और खेल का आनंद लो। दबाव उठाना उनका काम नहीं है। वरिष्ठ खिलाड़ी उसे संभालने के लिए मौजूद हैं। मैं चाहती हूं कि वे अपने खेल पर ध्यान दें और मैदान पर खुद को खुलकर व्यक्त करें।”

कप्तान ने माना कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को स्वाभाविक रूप से घबराहट होती है, लेकिन जरूरी है कि उस भावना को सकारात्मक ऊर्जा में बदला जाए।

उन्होंने कहा कि भारत का पूल चुनौतीपूर्ण है और टीम हर मुकाबले में स्पष्ट रणनीति तथा जीत की मानसिकता के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।

टेटे ने यह भी कहा कि कप्तान के तौर पर उनकी प्राथमिकता टीम के माहौल को सकारात्मक बनाए रखना है। मैच के दौरान किसी खिलाड़ी से गलती होने पर उसे सीखने और सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर कोई गलती करता है तो कोई बात नहीं। हम उससे सीखेंगे और सुधार करेंगे। मैं टीम में सकारात्मकता और ऊर्जा लाना चाहती हूं। हम अच्छा कर रहे हैं, लेकिन इससे भी बेहतर कर सकते हैं।”

भारतीय कप्तान ने टीम की गोलकीपरों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि गोलकीपरों का आत्मविश्वास मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों को खुलकर आक्रमण करने की हिम्मत देता है।

टेटे ने कहा कि जब खिलाड़ियों को भरोसा होता है कि गोलकीपर पीछे से रक्षा संभाल रहे हैं, तो वे बिना डर के आगे बढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा, “जब आपको पता होता है कि आपका गोलकीपर आपके पीछे है, तो आप बिना डर के खेलते हैं। डर के साथ खेलने पर हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकते। हम हर गेंद के लिए लड़ने और हर मुकाबले में अपना सबकुछ देने के लिए तैयार हैं।”

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