संसद की एक स्थायी समिति ने असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर स्थित NHPC के 2,000 मेगावाट सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की लागत में करीब 345 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। समिति ने अधिक लागत या समय बढ़ोतरी वाली बिजली परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की सिफारिश की है।
लोक उपक्रम समिति ने NHPC लिमिटेड से संबंधित अपनी 31वीं रिपोर्ट में कहा कि सुबनसिरी परियोजना की अनुमानित पूरी होने वाली लागत बढ़कर 27,948.52 करोड़ रुपये हो गई है। यह परियोजना की मूल आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा स्वीकृत 6,285.33 करोड़ रुपये की लागत से 344.66 प्रतिशत अधिक है।
समिति ने इसे NHPC की परियोजनाओं में लागत बढ़ने का सबसे गंभीर मामला बताया है।
सुबनसिरी लोअर एक बड़ी जलविद्युत परियोजना है, जिसे सरकारी कंपनी NHPC द्वारा असम और अरुणाचल प्रदेश में सुबनसिरी नदी पर विकसित किया जा रहा है। परियोजना को सितंबर 2003 में मंजूरी मिली थी और जनवरी 2005 में इसका निर्माण शुरू हुआ था। परियोजना से हर साल 7,422 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
लागत बढ़ने का असर परियोजना से मिलने वाली बिजली की कीमत पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना का लेवलाइज्ड टैरिफ 1.93 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 7.49 रुपये प्रति यूनिट हो गया है।
NHPC ने समिति को बताया कि परियोजना में लंबे समय तक देरी के पीछे कई कारण रहे। इनमें स्थानीय विरोध-प्रदर्शन, काम रुकना और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाया गया स्थगन शामिल है। कई वर्षों तक प्रभावित रहने के बाद अक्टूबर 2019 में निर्माण कार्य फिर शुरू हुआ। इसके अलावा अतिरिक्त कार्यों, कोविड-19 महामारी और प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों ने भी परियोजना में देरी की।
संसदीय समिति ने माना कि परियोजना में देरी के लिए बाहरी परिस्थितियां भी जिम्मेदार थीं, लेकिन इस अनुभव से परियोजना निगरानी, हितधारकों के प्रबंधन और मंजूरियों के लिए बेहतर समन्वय की आवश्यकता सामने आती है।
समिति ने विद्युत मंत्रालय से सिफारिश की है कि जिन परियोजनाओं में समय या वित्तीय लागत में 20 प्रतिशत या उससे अधिक का अंतर हो, उनके लिए त्रैमासिक निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। ऐसे मामलों को सचिव स्तर के निगरानी समूह के सामने भी रखा जाए।
समिति ने सुबनसिरी परियोजना की समयसीमा में हुए बदलावों का व्यापक मूल्यांकन करने की भी सिफारिश की है, ताकि इससे सीख लेकर अन्य चल रही और भविष्य की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिल सके।
रिपोर्ट के अनुसार, NHPC की तीन परियोजनाएं फिलहाल समय और लागत बढ़ोतरी का सामना कर रही हैं। इनमें सुबनसिरी लोअर के अलावा 500 मेगावाट की तीस्ता-VI परियोजना और सिक्किम की 120 मेगावाट की रंगित-IV परियोजना शामिल हैं।
NHPC विद्युत मंत्रालय के अधीन नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है और मुख्य रूप से जलविद्युत परियोजनाओं के विकास एवं संचालन से जुड़ा है।