IMG-LOGO

वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेश मंत्री का आह्वान: भारत-आसियान के बीच और मजबूत सहयोग जरूरी

Posted on: 2026-07-22
IMG
वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेश मंत्री का आह्वान: भारत-आसियान के बीच और मजबूत सहयोग जरूरी

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और उथल-पुथल के इस दौर में कोई भी देश या क्षेत्रीय समूह अकेले चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता। उन्होंने भारत और आसियान (ASEAN) के बीच मजबूत और गहरे सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। मनीला में ‘भारत के साथ आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस’ को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि सम्मेलन की थीम ‘एक साथ हमारे भविष्य को आगे बढ़ाना’ आज की वैश्विक स्थिति को बखूबी दर्शाती है।

उन्होंने कहा, “दुनिया बहुत उथल-पुथल भरी है और यह बात तेजी से साफ हो रही है कि कोई भी एक देश या समूह अकेले इससे नहीं निपट सकता।” विदेश मंत्री ने सदस्य देशों से अपील की कि वे आगे की ओर देखें और तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में साझा हितों को बेहतर ढंग से कैसे पूरा किया जा सकता है, इस पर विचार करें।

प्रमुख मुद्दों पर जोर

डॉ. एस. जयशंकर ने सप्लाई चेन पर दबाव, ऊर्जा, भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा तथा समुद्री व्यापार की स्थिरता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन जरूरी है। उन्होंने बताया कि 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा, जो स्थिर और सुरक्षित भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। विदेश मंत्री ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद भारत और आसियान दोनों भविष्य को लेकर आशावादी हैं। 

उन्होंने दोनों पक्षों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों का जिक्र किया:

– व्यापार और निवेश 
– लोगों की आवाजाही और टैलेंट 
– प्रौद्योगिकी, डिजिटल और हवाई संपर्क 
– ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी 
– कनेक्टिविटी

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जोर देकर कहा, “सिर्फ गहरे सहयोग से ही हम जोखिम कम कर सकते हैं और विविधता ला सकते हैं।”

इंडो-पैसिफिक में भारत-आसियान की भूमिका

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका एक अहम सिद्धांत है। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की समृद्धि के लिए दोनों पक्षों के सहयोग की सराहना की और कहा कि आसियान का इंडो-पैसिफिक नजरिया भारत की ‘इंडो-पैसिफिक ओशियन्स इनिशिएटिव’ के साथ पूरी तरह मेल खाता है।

उन्होंने कहा कि भारत और आसियान की कुल आबादी दो अरब है, और इस बदलाव के दौर में दोनों को मिलकर काम करना होगा ताकि दुनिया सुरक्षित और स्थिर बनी रहे। यह सम्मेलन भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)

Tags: