संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आंध्र प्रदेश के साथ प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बेहतर हवाई कनेक्टिविटी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मजबूत साझेदारी स्थापित करने को उत्सुक है। यूएई के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मारी ने यह जानकारी दी।
मंत्री अल मारी ने कहा कि यूएई ने एआई और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में काफी क्षमता विकसित की है, जो आंध्र प्रदेश की फूड इकोनॉमी को नई ऊंचाई दे सकती है। उन्होंने कहा, “यूएई के पास ऐसी कंपनियां हैं जो हाई-लेवल टेक्नोलॉजी, खासकर एआई का इस्तेमाल करती हैं। हम इस तकनीक को आंध्र प्रदेश ला सकते हैं, जो उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने में मदद करेगी।” अल मारी ने हवाई कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों, विचारों, प्रौद्योगिकी और पूंजी की आवाजाही आसान होगी, जिससे पर्यटन और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
भारत-यूएई संबंधों की तारीफ
मंत्री ने भारत-यूएई संबंधों को दुनिया के सबसे मजबूत संबंधों में से एक बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यवसायों के लिए सहयोग आसान हो गया है। उन्होंने BRICS पर्यटन बैठक जैसे मंचों के जरिए भारत के साथ जुड़ाव जारी रखने का संकल्प दोहराया।
अल मारी ने कहा, “मैं साल में 3-4 बार से ज्यादा भारत आता हूं। हमारा प्रयास है कि दोनों देशों के बीच का पुल और मजबूत हो और ज्यादा से ज्यादा कंपनियां निवेश के लिए आगे आएं।”
आंध्र प्रदेश दौरा और निवेश की संभावनाएं
यूएई के एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में आंध्र प्रदेश का दौरा किया। इस दल में 17 कंपनियों के 23 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल थे, जो फूड क्लस्टर और फूड प्रोसेसिंग के अवसर तलाश रहे थे।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात और संभावित प्रोजेक्ट साइट्स के निरीक्षण के बाद 4-5 कंपनियां पहले ही निवेश के प्रति गहरी दिलचस्पी दिखा चुकी हैं। अल मारी ने कहा कि आंध्र प्रदेश यूएई की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यूएई अपना 90-95 प्रतिशत भोजन आयात करता है।
इसके अलावा क्वांटम वैली, मेडिटेक, स्पेस और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में भी लंबे समय के सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। यह साझेदारी न सिर्फ आंध्र प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि भारत-यूएई के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा भी प्रदान करेगी। (इनपुट-एजेंसी)