IMG-LOGO

सफेद सोना बना रहा भारत: 2031 तक 498 लाख गांठ उत्पादन का रखा महत्वाकांक्षी लक्ष्य

Posted on: 2026-07-20
IMG
सफेद सोना बना रहा भारत: 2031 तक 498 लाख गांठ उत्पादन का रखा महत्वाकांक्षी लक्ष्य

कपास भारत की कृषि और वस्त्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश कपास की चारों प्रमुख प्रजातियों (G. Arboreum, G. Herbaceum, G. Barbadense और G. Hirsutum) की खेती करने वाला दुनिया का एकमात्र देश है। क्षेत्रफल के मामले में विश्व में पहले और उत्पादन में दूसरे स्थान पर काबिज भारत अब गुणवत्ता, उत्पादकता और ब्रांडिंग के जरिए वैश्विक कपास बाजार पर और मजबूत पकड़ बनाने की तैयारी कर रहा है।

वर्ष 2025-26 (अस्थायी आंकड़े) में भारत में कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ (लगभग 4.95 मिलियन टन) रहा, जबकि घरेलू खपत 328 लाख गांठ तक पहुंच गई। कपास उत्पादन को आमतौर पर गांठों में मापा जाता है। यह कपास व्यापार में प्रयुक्त मानक इकाई है। एक गांठ 170 किलोग्राम के बराबर होती है।

कपास उत्पादकता मिशन इसका सबसे बड़ा उदाहरण 

वहीं वैश्विक रेशा उत्पादन में भारत का योगदान करीब 19-23 प्रतिशत है। यह फसल सीधे 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है और इससे जुड़े उद्योगों में 40-50 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। सरकार ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए कई महत्वाकांक्षी कदम उठाए हैं। कपास उत्पादकता मिशन (2025-26 से शुरू) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 

मुख्य फोकस 

5,659.22 करोड़ रुपये के बजट वाले इस मिशन का लक्ष्य 2031 तक उत्पादन को 498 लाख गांठ तक बढ़ाना है। मिशन जलवायु-प्रतिरोधी, उच्च उपज वाली और अतिरिक्त लंबे रेशे (ELS) वाली किस्मों पर खास फोकस कर रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मजबूत किया गया है। 2026-27 सीजन के लिए मध्यम रेशे वाली कपास का MSP 8,267 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाली का 8,667 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। 

ज्ञात हो, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने 2025-26 में 105.09 लाख गांठ कपास खरीदी, जिसकी कीमत 41,530 करोड़ रुपये रही। कस्तूरी कॉटन भारत ब्रांडिंग कार्यक्रम के तहत ट्रेसबिलिटी, ब्लॉकचेन और QR कोड आधारित प्रमाणीकरण शुरू किया गया है। अब तक 3.29 लाख गांठों को प्रमाणित किया जा चुका है। 

कपास अब सिर्फ रेशा नहीं, बल्कि बहुमुखी फसल

कपास अब सिर्फ रेशा नहीं, बल्कि बहुमुखी फसल बन गई है। इसके बीज से हृदय अनुकूल तेल, पशु चारा, मेडिकल कॉटन और बायोमास ईंधन भी मिलता है। भारत के उत्तरी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में फैली यह फसल अब प्रौद्योगिकी, बाजार सुधार और निर्यात पर जोर के साथ “स्वदेशी से आत्मनिर्भर भारत” तक की यात्रा कर रही है। 

Tags: