केंद्र सरकार की ‘सेमिकॉन 2.0’ योजना से अगले पांच वर्षों में 1.5 लाख से 2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हो सकते हैं। उद्योग जगत का मानना है कि यह योजना भारत को केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली केंद्र से आगे बढ़ाकर वैश्विक चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग और नवाचार हब बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
भर्ती एवं कार्यबल समाधान कंपनी एनएलबी सर्विसेज (NLB Services) के विश्लेषण के अनुसार, सेमिकॉन 2.0 का अगला चरण सिर्फ चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इसका फोकस चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA), एआई आधारित मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और स्मार्ट सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर होगा।
यह आकलन ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1.27 लाख करोड़ की सेमिकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सचिन अलुग ने कहा कि वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की करीब 70 प्रतिशत नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा, जिससे उच्च कौशल वाले इंजीनियरों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि 2030 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs) की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इससे भारत वैश्विक इंजीनियरिंग, अनुसंधान और नवाचार केंद्र के रूप में और मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग अब तक मुख्य रूप से असेंबली आधारित रहा है, लेकिन सेमिकॉन 2.0 के जरिए देश चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और एडवांस्ड पैकेजिंग जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ा सकेगा।
इससे पहले इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) ने कहा था कि सेमिकॉन मिशन के पहले चरण में 20 अरब डॉलर से अधिक के प्रस्तावित निवेश आकर्षित किए गए हैं। दूसरे चरण में फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, प्रतिभा विकास, उपकरण और कच्चे माल पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का भरोसेमंद साझेदार बन सके।
सरकार के अनुसार, सेमिकॉन 2.0 के तहत चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन यूनिट, ATMP/OSAT इकाइयों, अनुसंधान एवं विकास तथा कौशल विकास सहित छह प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। अब तक सरकार 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है, जिनमें ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।