बिलासपुर, 18 जुलाई । छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 24 घंटे की रिकॉर्ड बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। तेज बहाव में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों परिवार घरों में फंस गए। हालात इतने गंभीर हो गए कि एसडीआरएफ को कॉलोनियों के भीतर नाव चलाकर लोगों को सुरक्षित निकालना पड़ा। सड़कें, रेलवे ट्रैक, कॉलोनियां और बाजार पानी में डूब गए, बिजली-पानी की व्यवस्था चरमरा गई और करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने शुक्रवार तक बिलासपुर शहर की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। शहर के कई हिस्सों में छह से आठ फीट तक पानी भर गया। जिन इलाकों में पिछले दो दशकों में कभी जलभराव नहीं हुआ था, वहां भी इस बार पानी लोगों के घरों में घुस गया। हालात ऐसे रहे कि परिवारों को पूरी रात घर बचाने के बजाय सामान सुरक्षित करने की जद्दोजहद करनी पड़ी।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में देवनंदन नगर फेस-1 और 2, गीतांजलि सिटी, फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु विहार, वसंत विहार, सरोज विहार, जोरापारा, जबड़ापारा, अरपापार, रायपुर रोड, सकरी और शहर की बाहरी कॉलोनियां शामिल रहीं। कई घरों में फ्रिज, वॉशिंग मशीन, कूलर, सोफा सहित घरेलू सामान पूरी तरह पानी में डूब गया। लोगों को ग्राउंड फ्लोर छोड़कर पहली मंजिल पर शरण लेनी पड़ी।
सबसे दुखद घटना लिंगियाडीह निवासी 65 वर्षीय प्रमिला बाई के साथ हुई। शुक्रवार सुबह वह काम पर जाने के लिए निकली थीं। शीला अपार्टमेंट के पास उफनते नाले को पार करते समय तेज बहाव में बह गईं। कुछ घंटों बाद उनका शव राजकिशोर नगर स्थित ऊर्जा पार्क के पास अरपा नदी की झाड़ियों में फंसा मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि फिसलने के बाद वह तेज धारा की चपेट में आ गई थीं।
भारी जलभराव के कारण कई कॉलोनियों में लोग घंटों तक घरों में फंसे रहे। हालात बिगड़ने पर एसडीआरएफ की टीम को नाव के जरिए राहत एवं बचाव अभियान चलाना पड़ा। देवनंदन नगर, बंधवापारा, जगदंबा कॉलोनी, गीतांजलि सिटी, विजयापुरम, चौबे कॉलोनी और अन्य इलाकों से कुल 204 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बचाव अभियान के दौरान एक गंभीर मरीज तक ऑक्सीजन सिलेंडर भी पहुंचाया गया, जबकि पानी से घिरी एक बुजुर्ग महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बारिश थमने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुईं। घरों में जमा पानी निकालने, कीचड़ साफ करने और खराब हुए सामान को संभालने में पूरा दिन बीत गया। कई कॉलोनियों में शुक्रवार देर रात तक भी पानी नहीं उतर सका। शिवम होम्स, चौबे कॉलोनी और बंधवापारा जैसे इलाकों में लोग दूसरी रात भी पहली मंजिल पर रहने को मजबूर रहे।
लगातार जलभराव के चलते शहर के कई हिस्सों की बिजली एहतियातन बंद कर दी गई। इससे पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई और लोगों को बोतलबंद पानी का सहारा लेना पड़ा। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश ने नगर निगम के जल निकासी प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले तीन वर्षों में जलभराव रोकने के लिए करीब 18 करोड़ रुपये खर्च कर कई बड़े नालों का निर्माण कराया गया था। इसके बावजूद बंधवापारा, लिंक रोड, पुराना बस स्टैंड, तालापारा और यदुनंदन कॉलोनी जैसे इलाकों में पानी भर गया। कहीं अधूरे नाले समस्या बने तो कहीं पुराने संकरे नालों और ओवरलोड ड्रेनेज सिस्टम के कारण पानी की निकासी नहीं हो सकी।
भारी बारिश का असर शहर के परिवहन तंत्र पर भी पड़ा। बिलासपुर-कोरबा और बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग सहित कई राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर पानी भर जाने से यातायात बाधित हो गया। कुटीघाट में लीलागर नदी पुल के ऊपर तीन से चार फीट तक पानी बहता रहा, जिससे आवागमन पूरी तरह बंद हो गया।
रेलवे यार्ड और स्टेशन परिसर में ट्रैक डूब जाने से रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं। सात ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि चार ट्रेनों के मार्ग और परिचालन में बदलाव किया गया। कुछ ट्रेनें बीच रास्ते से वापस लौटीं और एक मेमू ट्रेन का संचालन निर्धारित गंतव्य तक नहीं हो सका।
लगातार बारिश के कारण शनिचरी, व्यापार विहार और एसबीआर कॉलेज सब-स्टेशन सहित कई विद्युत प्रतिष्ठानों में पानी भर गया। 17 ट्रांसफार्मर जलमग्न होने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से बिजली आपूर्ति रोकनी पड़ी।
स्थिति गंभीर होते ही जिला प्रशासन, नगर निगम, एसडीआरएफ और पुलिस ने संयुक्त राहत अभियान शुरू किया। प्रभावित कॉलोनियों में जेसीबी, पंपिंग मशीन और जेट सक्शन मशीनों से पानी निकाला गया। नाव और ट्रैक्टर की मदद से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। जिन परिवारों के घरों में भोजन बनाना संभव नहीं था, उन्हें नगर निगम ने लगभग 1700 फूड पैकेट वितरित किए। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी राहत कार्य में सहयोग किया। कई इलाकों में नालियों की सफाई कर जल निकासी की व्यवस्था कराई गई, जबकि प्रभावित परिवारों के बीच भोजन और चाय-नाश्ता वितरित किया गया।
इस बीच, शहर में जलभराव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्ष ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर बारिश के सामने पूरी तरह बेबस नजर आया।
मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय मानसून, निम्न दाब क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले 24 घंटे भी राहत मिलने की संभावना कम है। बिलासपुर संभाग सहित आसपास के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की है।