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Pakistan: पंजाब प्रांत में आटे का संकट गहराया, घाटे के कारण 40% मिलें बंद

Posted on: 2026-05-21
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Pakistan: पंजाब प्रांत में आटे का संकट गहराया, घाटे के कारण 40% मिलें बंद

Lahore : पाकिस्तान के रावलपिंडी-इस्लामाबाद इलाके में आटा मिलिंग इंडस्ट्री एक गंभीर संकट की चपेट में आ गई है। बताया जा रहा है कि यहाँ लगभग 40 प्रतिशत आटा मिलों ने अपना काम बंद कर दिया है। इसकी वजह लगातार बढ़ता आर्थिक नुकसान और, जैसा कि इंडस्ट्री के बड़े लोगों का कहना है, सरकार की गलत नीतियाँ हैं। आटा मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर पंजाब सरकार ने गेहूँ और आटे के वितरण सिस्टम में तुरंत सुधार नहीं किया, तो जल्द ही और भी मिलें बंद हो सकती हैं। यह जानकारी \'डॉन\' अखबार ने दी है।

डॉन के मुताबिक, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ को लिखे एक कड़े पत्र में, पाकिस्तान आटा मिल एसोसिएशन (पंजाब) के पूर्व उपाध्यक्ष, एडवोकेट चौधरी अफ़ज़ल महमूद ने अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे लगातार बदलते नियमों और सरकारी दखलंदाज़ी के ज़रिए इस सेक्टर को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। यह बयान आटा मिल मालिकों के बीच WhatsApp ग्रुप्स के ज़रिए बड़े पैमाने पर फैलाया गया। इस पत्र में दावा किया गया है कि रावलपिंडी और इस्लामाबाद के आटा मिल मालिकों को दक्षिणी पंजाब के मुकाबले भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जहाँ गेहूँ पैदा करने वाले ज़िलों को कथित तौर पर ज़्यादा तरजीह दी जाती है।

इन दोनों शहरों (रावलपिंडी और इस्लामाबाद) के आटा मिल मालिकों को निजी सप्लायरों से गेहूँ खरीदना पड़ रहा है, जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्च काफी बढ़ जाता है। इससे गेहूँ की कीमत में प्रति मन (लगभग 40 किलो) 200 से 250 रुपये की बढ़ोतरी हो जाती है। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि सरकार की मौजूदा कीमतों से जुड़ी नीतियों के कारण मिलों का टिके रहना नामुमकिन होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जहाँ एक तरफ गेहूँ की कीमत लगभग 4,100 रुपये प्रति मन तक पहुँच गई है, वहीं अधिकारी आटा मिल मालिकों पर आटा लगभग 4,000 रुपये प्रति मन बेचने का दबाव डाल रहे हैं। बिजली का खर्च, कर्मचारियों की तनख्वाह और दूसरे खर्चों को जोड़ने के बाद, मिल मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आटा मिल मालिकों ने खाद्य विभाग पर मनमाने ढंग से नियंत्रण लगाने और रोज़ाना बदलते हुए नीति-निर्देश जारी करने का आरोप लगाया है।

इस पत्र में यह भी बताया गया है कि आटा मिलों को गेहूँ खरीदने के लिए जो परमिट दिए जाते हैं, वे मिलों को लगातार चलाने के लिए काफी नहीं हैं। कुछ मिलों को तो हर चार दिन में सिर्फ़ 40 टन गेहूँ ही मिल पाता है। कई आटा मिल मालिकों ने कहा कि इस इंडस्ट्री में लगाए गए अरबों रुपये पहले ही डूब चुके हैं। इसके चलते कई मिलें बंद हो गई हैं और इस सेक्टर से जुड़े हज़ारों मज़दूर बेरोज़गार हो गए हैं।

यह जानकारी भी डॉन अखबार ने दी है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, आटा मिल मालिकों ने पंजाब सरकार से अपील की है कि वह आटे की कीमतों के लिए एक जैसा सिस्टम लागू करे, पूरे पंजाब में गेहूँ का बराबर वितरण सुनिश्चित करे, और इस मुश्किल दौर से गुज़र रही इंडस्ट्री को बचाने के लिए सरकारी नियंत्रण की जगह बाज़ार-आधारित सिस्टम अपनाए।


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