अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 25 पैसे कमजोर होकर 94.47 (प्रोविजनल) पर बंद हुआ। पिछले दो कारोबारी सत्रों में रुपये में आई मजबूती के बाद यह गिरावट दर्ज की गई। फॉरेक्स मार्केट में यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण देखा गया। विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। ईरान द्वारा अमेरिका पर सीज़फायर तोड़ने का आरोप लगाए जाने के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। इसी बीच अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट और कुछ नागरिक क्षेत्रों में नए हमलों की खबरों ने भी चिंता को और गहरा किया।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सीज़फायर अभी भी प्रभावी है, लेकिन इस बयान के बावजूद बाजार में भरोसा पूरी तरह नहीं बन सका और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इसी तनाव के बीच कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में भी तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। US-ईरान शांति समझौते की उम्मीदों के चलते ब्रेंट ऑयल की कीमतें पहले लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थीं। लेकिन बाद में मिडिल ईस्ट में फिर से बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के कारण कीमतें वापस बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गईं।
में रुपया 94.58 पर खुला और दिनभर के कारोबार में दबाव में रहा। कारोबार के दौरान यह 94.68 तक गिर गया, जो पिछले बंद स्तर की तुलना में 46 पैसे की कमजोरी को दर्शाता है। अंत में यह कुछ सुधार के साथ 94.47 पर बंद हुआ। फॉरेक्स डीलरों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर रुझान (सेफ-हेवन डिमांड) के कारण डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और तेल बाजार स्थिर नहीं होता, तब तक रुपये में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रमों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में ये ही मुद्रा बाजार की दिशा तय करेंगे।